लखीमपुर खीरी। जिले के सीएमओ डॉ० संतोष गुप्ता ने आज अपने स्वास्थ्य प्रशासन के महायोग के पूरे तीन साल पूरे कर लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक यह उपलब्धि “अमर बेल” जैसी मानी जा रही है—जहां बाकी अधिकारी आते-जाते रहते हैं, वहीं सीएमओ साहब की कुर्सी जड़ें जमा चुकी है।
कहा जा रहा है कि जिले में मरीजों से ज्यादा तो ट्रांसफर की चर्चा होती है, मगर सीएमओ साहब इस चर्चा से भी इम्यून हो चुके हैं। तीन साल में कई शिकायतें आईं, एक ईमानदार डिप्टी सीएमओ ने तो हार मानकर इस्तीफा भी दे दिया—लेकिन सीएमओ साहब पर कोई असर नहीं पड़ा। लगता है इन्हें “अदृश्य कवच” का सरकारी टीका लग चुका है।
मीडिया ने भी पहले तो खबरें चलाईं, फिर ब्रेकिंग छोड़कर अब “ब्रेकिंग से ब्रेक” ले लिया। आखिर कब तक “सीएमओ अटल” पर खबरें चलतीं!
अब जिले के लोग भी कहने लगे हैं — “जहां डॉक्टर बदलते हैं, वहां बीमारियाँ भी बदलती हैं… पर हमारे यहां न डॉक्टर बदले, न बीमारी!” ऐसे में जनता अब सीएमओ साहब को “स्थायी स्वास्थ्य संरक्षक” का दर्जा देने की मांग कर रही है। कुल मिलाकर, ट्रांसफर विभाग अब इस मामले को “संवेदनशील नहीं, बल्कि अटल रोग” मान चुका है। जय हो ऐसे सीएमओ की और उन अदृश्य शक्तियों की, जिनकी कृपा से कुर्सी भी स्वस्थ और स्थिर बनी हुई है!

